बिहार में बीते अप्रैल माह में एक बड़ा राजनीतिक परिवर्तन हुआ मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार ने अपने ही हाथों से बिहार के नीतीश युग के समापन पर हस्ताक्षर कर दिया। अपने ऐतिहासिक कार्यकाल में बिहार के सर्वाध्कि दिनों तक मुख्यमंत्राी पद पर बने रहने वाले ये पहले मुख्यमंत्राी के रूप मेें नाम दर्ज करा लिया है। इन्हें विरासत में जंगल राज से कुख्यात बिहार मिला था और बिहार…
Read moreवैश्य समाज स्वावलंबी और स्वतंत्रा जीवी स्वभाव का समाज है। थोड़ी-सी पूंजी में अपना जीवन यापन करने की कला में माहिर है, वह समाज का परम हितैषी है और मध्ुमक्खी की तरह समाज से ही अपने जीवन जीने का साध्न जुटाता है, अपनी सम्मान की रक्षा करता है और दूसरों को सहयोग करने, उसके आत्मसम्मान, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा में भरपूर सहयोग करता है। सामाजिक गतिविध् िके पहि…
Read moreमुंगेर विधानसभा के चुनावी इतिहास में वर्ष 2025 वैश्य समाज के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। मुंगेर जिला के तीनों विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए ने एक वैश्य प्रत्याशी को तो विपक्षी गठबंधन यूपीए ने दो वैश्य प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। मुंगेर विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी ने अपने निवर्तमान विधायक प्रणव यादव का टिकट काट कर अपने पूर्व के जिलाध्यक्…
Read more2011 ई. में भारत में जनगणना की गयी थी। 2023 ई. में बिहार में जातिय सर्वे किया गया था। 2011 ई. की जनगणना के अनुसार बिहार की आबादी 10 करोड़ 40 लाख 99 हजार 452 थी। 2023 के जातिय सर्वे में बिहार की आबादी 13 करोड़ 7 लाख 25 हजार 310 हो गयी। दोनों आकंड़ों की तुलना करने पर 33.2622% वृद्धि हुई है इस वृद्धि के मद्देनजर रखते हुए वैश्य के विभिन्न घटकों की आबादी के साथ…
Read moreपंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का कथन है- ‘‘हम सुध्रेंगे, युग बदलेगा।’’ हिन्दू एकता में वैश्य समाज ने इस कथन को अपनाया है। हिन्दू समाज में वर्णवाद, जातिवाद के साथ ही दहेज प्रथा बहुत बड़ा कोढ़ है। दहेज प्रथा के कारण भ्रष्टाचार को उर्जा मिलती है। भ्रष्टाचार बढ़ाने में दहेज प्रथा की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। बिहार वैश्य समाज में 54 जातियां आती है। जिसका दैनिक…
Read moreअध्र्मीय ने भारत की एकता को खंडित करने के लिए राष्ट्रविरोध्ी शक्तियों के साथ हाथ मिलाकर यहां के डेमोग्रापफी को बिगाड़ कर लोकतंत्रा की आड़ में इस्लाम को मजबूत कर भारत को इस्लामिक देश बनाने का षड्यंत्रा रचा है। इसके लिए येण-केण प्रकारेण ध्र्मान्तरण करा रहा है। ताकि जल्द से जल्द वह भारत को इस्लामी देश बना सके। इस्लाम का उदय 610 ई. में हुआ। 610 ई. के पहले विश…
Read moreचुनाव में जब यह बताया जाता है कि 60-70%मतदान होता है, तो कई सवाल सामने आते हैं-30-40» मतदाताओं ने मतदान क्यों नहीं किया? मतदान का कम होना यह बताता है कि लोगों की आस्था लोकतंत्रा में कम हैऋ चूंकि यह एक तिहाई लोग होते हैं, यह संख्या महत्वपूर्ण है। मतदान का कमी यह भी बताता हैकि लोगों का सत्ता पक्ष और विपक्ष पर भरोसा नहीं है। लोगों के नाराजगी को व्यक्त करने क…
Read moreबिहार में आगामी विधनसभा चुनाव लड़ने वाले लगभग दलीय प्रत्याशी अपने उपलब्धिें के बिना केवल और केवल सुप्रीमों के भरोसे ही चुनाव ही लड़गें। भाजपा के तारणहार प्रधनमंत्राी नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्राी अमित शाह हैं, जदयू मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार, लोजपा ;राम विलासद्ध के चिराग पासवान, हम के नेता जीतन राम माँझी, राजद के तेजस्वी यादव, जन सुराज के प्रशांत किशोर, कांग…
Read moreभारतीय समाज में जातिवाद एक गहरी जड़ें जमाए हुई समस्या है, जिसने सामाजिक संरचना को कमजोर किया है। जातिगत आधर पर शक्ति और सत्ता का निर्धरण कई बार तर्क, योग्यता और नैतिकता से अध्कि प्रभावशाली बन जाता है। इसी कारण, समाज में अक्सर बाहुबलियों को समर्थन मिलता है, जबकि बु(िमान और योग्य व्यक्ति उपेक्षित रह जाते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल सामाजिक न्याय के सि(ांतों के…
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वैश्य क्रांति पत्रिका के सम्पादक मैं दीपक कुमार पोद्दार आप से मुखातिब हूँ. आज के चर्चा का विषय है ईमानदार और दूरदर्शी नेतृत्व के अभाव में वैश्य-बनिया समूह की जातियाँ. वैश्य-बनिया जाति समूह में नेताओं की भरमार है लेकिन एक भी प्रदेश में नेतृत्व कर्ता नहीं है. खुशी है कि वैश्य-बनिया जाति समूह में विधान सभा स्तर के नेताओं की कमी नहीं है बिहार विधानस…
Read moreआपको जानकर बेहद खुशी होगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अपना देश भारत को अमीर देश के श्रेणी में ला खड़ा किया है। भारत विश्व की 5वीं अर्थशक्ति बन चुकी है। अंतरिक्ष के मामले में विश्व का चौथा देश बन गया है और चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश बन चुका है। सुरक्षा खर्च के मामले में अमेरिका और चीन के बाद तीसरा देश बन गया है। हमार…
Read moreशिक्षा का नाता सभी से है, वैश्य समाज इसका अपवाद नहीं है। छात्रा भी वैश्य है और शिक्षक भी वैश्य अर्थात् शिक्षा सभी से संबंध्ति है। इसलिए यह कापफी महत्वपूर्ण विषय है हमारा दिमाग तेजी काम करता है लेकिन, इसकी सपफलता में योगदान सभी अंगों का होता है। पांव में जख्म हो, दर्द अध्कि हो तो दिमाग अपना काम सही-सही नहीं कर पाता है। कहने का आशय है कि पूर्ण पफल/परिणाम के…
Read moreवैश्य नामित अनेकानेक संगठन के साथ-साथ वैश्य के अनेक घटकों में एकाध्कि संगठन हैं। लेकिन किसी के पास समाज और प्रदेश की आवश्यकता पूर्ति के लिए, न कोई सपना है, ना ही योजना है। केवल और केवल मुंहजुबानी अपने आप को श्रेष्ठ कहने का खुली प्रतियोगिता है। काम के आधर पर श्रेष्ठता सि( करने की विचार का घोर अभाव है। पंचायत के वार्ड स्तर से लेकर मुखिया जिला परिषद तथा नगर क…
Read moreसम्पादक जी महाराज, जय हो! बिहार विधनसभा का मानसून सत्रा चलने वाला था, गुप्त सूत्रों से पता चला प्रदेश के बड़का-बड़का नेता कुछ गुपचुप करने वाले हैं। बुलावा आ गया, राजनीतिक भविष्य पर भविष्यवाणी करना है साहब! कुछ हो सके तो ज्ञान दे जाइए। देखते हैं आगे क्या होता है? कुछ हुआ तो जुगाड़ लगाएंगे। वैसे तो जानते ही हैं, हमलोग का नेचर। आज यहां, कल वहां। वा…
Read moreप्रकृति या ईश्वर ने मानव तन देकर बड़ा उपकार किया है, लेकिन इस जीवन में कुछ ऐसी परिस्थितियों का सामना होता है कि हम निराशा के दलदल मंे पफंस जाते हैं। इस भयंकर दुःखदायी निराशा को व्यक्त किया है, 1957 की फिल्म अब दिल्ली दूर नहीं में महान गीतकार शैलेन्द्र द्वारा रचित गाना जिसे संगीतबद्ध किया है दत्ताराम और गायी है सुधा मल्होत्रा। इस गाना का बोल है - ‘‘मालिक त…
Read moreवर्ष 2023 में उच्च शिक्षा पाने के लिए लगभग साढ़े सात लाख भारतीय छात्रा-छात्राएँ विदेश रवाना हो गये हैं। भारत का सर्वश्रेष्ठ शिक्षा संस्थान आई. आई.एससी बंगलौर है लेकिन क्यूएस रैंकिंग में इसका स्थान विश्व में 155 है। अर्थात् दुनिया में क्यूएस रैंकिग में भारत 150 स्थानों में नहीं है। क्यूएस रैंकिंग में पिछली बार दिल्ली विश्वविद्यालय 501-510 में था, जो पिफ…
Read moreबिहार में वैश्य का अपना राजनीतिक दल बने, जो तीसरा विकल्प के रूप में जनता के सामने उपस्थित हो। वैश्य समाज और अनुसूचित समाज का समीकरण बनाया जाए। दोनों समाज का वोट बैंक लगभग 45» हो जाता है। बिहार और बिहारियों के सर्वांगीण हित की बात होने पर 45» वोट के साथ-साथ अन्य वोट का जुड़ाव होगा। बिहार में वैश्य समाज में अच्छी खासी संख्या में राजनीतिक कार्यकर्ता बने हैं।…
Read moreबिहार में जितने भी वैश्य नामित संगठन है प्रायः झोली ढ़ोलवा संगठन है, जो विभिन्न राजनीतिक दलों की झोली ढ़ोती है और इसके नेता का वैश्य जाति के उत्थान से कोई लेना-देना नहीं है। इसका अपने उत्थान मात्रा से मतलब है, इन्हें किसी तरह से एम.एल.ए या एम.एल.सी का टिकट मिल जाए, वैश्य के नाम पर ये पांच-छः वर्ष मजा ले, पिफर जीवन भर पेंशन उठाते रहें। वैश्य नामित संगठन के…
Read moreनगर का क्षेत्र , व्यापारिक क्षेत्र होता है और व्यापार में , अधिकांश लोग वैश्य समाज के भाग लेते या करते हैं , इसलिए नगरीय क्षेत्र वैश्य बाहुल्य होता है या माना जाता है। नगर-निकाय चुनाव में अधिकाधिक वैश्य का चुनाव में आना और निर्वाचित होना वैश्य के राजनैतिक जागरूकता को प्रदर्शित करेगा। नगर-निकाय चुनाव में वैश्य जितना ज्यादा सफल होगा , इसका लाभ विध…
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