बनिया अर्थात् वैश्य के व्यवहार या व्यवसाय को बनियागिरी कहा जाता है। उच्च श्रेणी की आलोचना यह निंदा के लिए भी बनियागिरी शब्द का उपयोग किया जाता है। बनियागरी का समान्य अर्थ है अपने हित को प्राथमिकता देना। यह मानव का सहज या प्राकृतिक प्रवृत्ति है प्रायः आदमी अपने हित की प्राथमिकता देता है। बनियागिरी शब्द में शु( आर्थिक लाभ छुपा है, अतएव यह आलोचना के संदर्भ …
Read moreसम्पादक जी महाराज, जय हो! आजकल शरापफत छोड़ देने की मानो गंभीर प्रतियोगिता पूरी दुनिया में चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसमें स्वर्ण पदक पाने के प्रबल दावेदार हैं। भारत में शरापफत छोड़ने का दौर विगत कई वर्षों से चला आ रहा है। उत्तर प्रदेश सहित अनेक राज्य सरकारें शरापफत छोड़ने वालों का सम्मान उनके घर को बुलडोजर का दर्शन कराकर कर …
Read more21 वीं शताब्दी के शुभारंभ के दौर में वैश्य संदेश/वैश्य क्रान्ति के प्रकाशन की शुरूआत वर्ष 2002 ई. में मुंगेर से हुई। राजनीतिक रूप से यह बेचारी जाति के रूप में जानी जाती थी। राज्य अराजकता में कराह रहा था और सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव वैश्य समाज पर पड़ रहा था। जीना मुहाल हो गया था। जब मानव आपदाओं से घिर जाता है, उसके सामने मौत खड़ा हो जाता है, मरन सुनिश्चित लग…
Read moreबिहार में बीते अप्रैल माह में एक बड़ा राजनीतिक परिवर्तन हुआ मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार ने अपने ही हाथों से बिहार के नीतीश युग के समापन पर हस्ताक्षर कर दिया। अपने ऐतिहासिक कार्यकाल में बिहार के सर्वाध्कि दिनों तक मुख्यमंत्राी पद पर बने रहने वाले ये पहले मुख्यमंत्राी के रूप मेें नाम दर्ज करा लिया है। इन्हें विरासत में जंगल राज से कुख्यात बिहार मिला था और बिहार…
Read moreवैश्य समाज स्वावलंबी और स्वतंत्रा जीवी स्वभाव का समाज है। थोड़ी-सी पूंजी में अपना जीवन यापन करने की कला में माहिर है, वह समाज का परम हितैषी है और मध्ुमक्खी की तरह समाज से ही अपने जीवन जीने का साध्न जुटाता है, अपनी सम्मान की रक्षा करता है और दूसरों को सहयोग करने, उसके आत्मसम्मान, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा में भरपूर सहयोग करता है। सामाजिक गतिविध् िके पहि…
Read moreसम्पादक जी महाराज, जय हो! काॅमर्स का एक छात्रा होता है तो विज्ञान का 10 छात्रा और कला का 100 छात्रा होता है। काॅमर्स और विज्ञान का छात्रा कोचिंग करता है, ट्यूशन पढ़ता है, काॅलेज रेगुलर करता हैऋ लेकिन कला के छात्रा को गेस पेपर पर ही भरोसा रहता है। परीक्षा के 3 महीने पहले गेस पेपर उपलब्ध् भी नहीं होता है, अध्कि-से-अध्कि दो माह पहले बाजार में…
Read moreसम्पादक जी महाराज, जय हो! आपको अपना दोस्त का पता है, दुश्मन का पता होता भी है, और नहीं भी होता है। कुछ दोस्त आस्तीन के सांप होते हैं, जो परिणाम आने के बाद पता चलता है। खैर, यह सब तो बाहरी है, आपके अंदर भी एक शत्राु छिपा है, और इसे पहचानना बहुत-बहुत कठिन है। जिसने इस शत्राु को पहचान लिया, उसे बाहरी शत्राु बहुत बिगाड़ नहीं पाते हैं, पफलतः वे सप…
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