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गरीब दास टहलन - व्यंग्य : शराफत छोड़ दी मैंने

सम्पादक जी महाराज,
    जय हो!
आजकल शरापफत छोड़ देने की मानो गंभीर प्रतियोगिता पूरी दुनिया में चल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसमें स्वर्ण पदक पाने के प्रबल दावेदार हैं। भारत में शरापफत छोड़ने का दौर विगत कई वर्षों से चला आ रहा है। उत्तर प्रदेश सहित अनेक राज्य सरकारें शरापफत छोड़ने वालों का सम्मान उनके घर को बुलडोजर का दर्शन कराकर कर रहे हैं, पुलिस पांव पर गोली मारकर उन्हें सम्मानित कर रही है। साॅल्वर गैंग जो शिक्षितों का गैंग है, डिग्री लेने के पूर्व वे सपफलतापूर्वक नौकरी दिलाने के सेवा में प्रयासरत हैं बदले में कृष्ण जन्मस्थली के दर्शन का परम सौभाग्य प्राप्त कर रहें हैं। अयोध्या राम जन्मस्थली के भव्य मंदिर के दान संग्रह से जुड़े लोगों ने अपना घर भरने के लिए शरापफत छोड़ दी और कृष्ण जन्म स्थली पहूँच चुके हैं। दहशतगर्दों पर भी कारवाई जारी है।
सरकार प्रशासन पुलिस की कारवाई सापफ-सापफ दिख रही है, हर हाथ में मोबाइल है, शरापफत छोड़ने का अंजाम पता है, पिफर भी लोग अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। सोशल मीडिया एक सागर है, जहां हर को अपने मन मुताबिक चीज मिल जाता है। हम समझते हैं कि सरकारी एक्शन ऐसे शरीपफों को होश में ला देगी, लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है। जिस हिसाब से एक्शन हो रहा है, उसी तरह शरापफत छोड़ने के ख्याल आसमां चूम रहा है। सिपाही भर्ती हो या कोई भी सेवा। जयपुर में 45 छात्रों से 5-5 लाख लेकर स्पेशल तंबू में उनके लिए प्रश्न पत्रा का उतर लिखाने की व्यवस्था की गयी थी, इसमें शामिल रहे वहां के मुख्य प्रबंध्क क्या उन्हें दिन-दुनिया का पता नहीं है, नेट पर सरकारी एक्शन, राम मंदिर पर एसआईटी एक्शन, बंगाल में सरकार बदलने पर इन शरीपफों का क्या हो रहा है।
सरकार बहादुर परीक्षा धंध्ली को राष्ट्रदोह से जोड़ दें और सजा में पफाँसी की व्यवस्था हो और तीन महीने के अंदर पफांसी की सजा सुनिश्चित हो, पफांसी देने की घटना का डायरेक्ट टेलिकास्ट किया जाए, सोशल मीडिया पर भी दिखाया जाए। शरापफत छोड़ने वालों को सच्चा नसीहत देने के लिए सरकार बहादुर को जल्द से जल्द कुछ करना ही चाहिए। पांव में गोली मारने, मकान ढ़ाहने के बावजूद इन बिगड़े दिमागों में शरापफत की राह पर चलने की ख्याल नहीं आया है। जिन्हें पैसा कमाने की जल्दी है चम्बल चले गए। कलमधरी, कलम का जब दुरूपयोग करते हैं तो पाप हजारों गुणा बढ़ जाता है। उम्मीद की जाती है सरकार बहादुर अपना इकबाल को बुलन्द रखने के लिए महीना में 50-100 लोगों के गले में पफांसी का माला डालकर उन्हें इस नरकीय जीवन से छुटकारा देकर स्वर्गीय जीवन के आनन्द प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करेगी। समय की मांग को सरकार बहादुर को गंभीरतापूर्वक समझना चाहिए।

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