Advertisement

सम्पादकीय : 25 साल का सफर...

21 वीं शताब्दी के शुभारंभ के दौर में वैश्य संदेश/वैश्य क्रान्ति के प्रकाशन की शुरूआत वर्ष 2002 ई. में मुंगेर से हुई। राजनीतिक रूप से यह बेचारी जाति के रूप में जानी जाती थी। राज्य अराजकता में कराह रहा था और सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव  वैश्य समाज पर पड़ रहा था। जीना मुहाल हो गया था। जब मानव आपदाओं से घिर जाता है, उसके सामने मौत खड़ा हो जाता है, मरन सुनिश्चित लगता है, जब तक मौत आ ना जाए, तब उसमें साहस का संचार होता है, पिफर वह व्यवस्था के साथ संग्राम करता है, आपदाओं को अवसर में बदल देता है। वैश्य समाज के मुट्ठी भर लोग सम्पन्न रहे हैं और हैं 
अध्किांश लोग मध्यम और निम्न वर्ग के हैं। रोज कमाने वाले हैं। सभी वर्ग के लोग शासन के कुव्यवस्था के आसान शिकार बने थे, आपदाएं व्यक्तिगत नहीं सामुहिक रही। वैश्य जाति के लोग जाति के उपनाम बताने से परहेज करते थे। व्यवस्थापिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका, पत्राकारिता और विभिन्न विभागों में चिराग लेकर वैश्य को ढूंढ़ना पड़ता था। ये अपने विभाग में सहमें-सहमें रहते थे।

बिहार प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में वैश्य संगठित होना शुरू किया। उपजातियां भी संगठित हुई। स्थानीय समीकरण के तहत उन्होंने अपने हित में राजनैतिक कदम उठाये। प्रदेश स्तर के संगठन अपनी कार्य प(ति के कारण कुछ स्थानों में सिमट गयी। इन 25 वर्षों में वैश्यों में शानदार-जानदार जागरूकता आयी है। राजनीतिक क्षेत्रों में भी अपनी पहचान के साथ महत्व बनायी है। 2014 ई. में नरेन्द्र मोदी के प्रधनमंत्राी बनने से वैश्यों के आत्मबल में अभूतपूर्व वृ(ि हुई वैश्य ध्नपतियों ने नौकरशाह के क्षेत्रा में परिवार को शामिल किया। फलतः विगत 10-12 वर्षों से सिविल सेवा में लगभग 10-12% स्थानों पर वैश्य सपफल हो रहा है। अब आपको किसी भी सरकारी कार्यालयों में वैश्य मिल जाएगा अब उन्हें उपजाति छिपाने की आवयश्यकता नहीं है।

प्रधनमंत्राी नरेन्द्र मोदी जी के बनने के उपरांत वैश्य प्रतिभाएं भी सामने आने लगी उन्हें अवसर मिलने लगा। केन्द सरकार में विभिन्न विभागों में वैश्य समाज के पदाध्किारी सर्वोच्च पदों पर हैं। अनेकानेक राज्यों के मुख्य सचिव और डीजीपी वैश्य समाज के आये हैं। 

इन 25 वर्षांे में वैश्य समाज के प्रगति का साक्षी वैश्य संदेश/वैश्य क्रांति रही है। वैश्य समाज क्या कर रहा है, इसकी जानकारी का स्त्रोत वैश्य क्रांति बना। वैश्य समाज को क्या करना चाहिए यह सलाह देना वैश्य क्राति का दायित्व रहा । वैश्य समाज, देश और प्रदेश के हित के लिए वैश्य क्रांति के सुझाव को केन्द्र और राज्य सरकारें मानती रही है।

वैश्य समाज के आम आदमी का जीवन संघर्षरत है। इनकी आर्थिक और शैक्षणिक दशा में सुधर के लिए बहुत काम करने की जरूरत है। वैश्य समाज को केवल रानजीतिक क्षेत्रा में संगठन की सक्रियता दिखता है। इसे आम वैश्यों के हित के लिए व्यापक सोच के साथ सरकार के योजनाओं से आम वैश्य को लाभान्वित कराने के लिए समयब(, योजनाब( कार्यक्रम की आवश्यकता है।

Post a Comment

0 Comments


जनोपयोगी महत्वपूर्ण पुस्तक