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बनियागिरी

बनिया अर्थात् वैश्य के व्यवहार या व्यवसाय को बनियागिरी कहा जाता है। उच्च श्रेणी की आलोचना यह निंदा के लिए भी बनियागिरी शब्द का उपयोग किया जाता है। बनियागरी का समान्य अर्थ है अपने हित को प्राथमिकता देना। यह मानव का सहज या प्राकृतिक प्रवृत्ति है प्रायः आदमी अपने हित की प्राथमिकता देता है। बनियागिरी शब्द में शु( आर्थिक लाभ छुपा है, अतएव यह आलोचना के संदर्भ में भी प्रयुक्त होता है। 

बनिया लोगों के सामान्य दैनिक आवश्यकता का ध्यान रखना है उसकी आवश्यकता पूर्ति करके अपने जीवन-निर्वहन का मार्ग प्रशस्त करता है। जिस तरह मध्ुमक्खी पफूलों के पराग से मध्ु का निर्माण करता है, इस तरह बनिया अपनी संपत्ति अर्जित करता है। मध्ुमक्खी पफूलों को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचती बल्कि अपने कार्य के दौरान परपरागण करती है जिससे बहुत प्रकार के पफूल, पफल में बदलता है। मध्ुमक्खी के इस कार्य में पफूल आपत्ति नहीं करते, उसे भी लाभ मिलता है। सदूर गांव में बनिया सुई से लेकर सामान्य दवा तक अपनी दुकान में रखता है और कुछ लाभ लेकर उसे बेचता है। गांव के लोगों को परेशानी से बचाता है। बनिया अपने समान को ध्ैर्यपूर्वक सुरक्षित रखता है। वह समय का महत्व समझता है और समय आने तक ध्ैर्य बनाकर रखता है सामान को सुरक्षित रखने की प्राकृतिक गुण उसके जीवन का अंग बन जाता है इसलिए वह रिश्ता को भी सहेजना जानता है पफलतः यह स्वभाव उसको सामाजिक बना देता है। सामान्य परिस्थिति में आसपास को उधर देकर किसी को भी संभाल देता है उसके तत्कालीन काम को आसान बना देता है एक कहावत है ‘लटपट न जनिया त काहे के बनिया’ अर्थात् वह उधर लेता और देता है, इसी के दौरान बिना पूंजी के लाभ अर्जित करता है बनिया की पूंजी उसका व्यवहार होता है। बनिया की पूंजी उसकी जुबान यानि भरोसा होती है। यह भी एक प्रसि( लोकोक्ति है ‘पूत मर जाए भला, लेकिन साबका ;भरोसाद्ध नहीं मरना चाहिए।’ इन विशिष्टताओं के कारण यह समाज का जरूरत बन जाता है पफलतः यह सामान्य रूप से आदर का पात्रा होता है इतिहास साक्षी है कि विभिन्न वर्गों में टकराव हुआ है, विभिन्न जातियों के बीच खुनी संघर्ष हुआ है लेकिन बनिया जाति के साथ किसी अन्य जाति का संघर्ष कभी भी कही भी नहीं हुआ है व्यक्तिगत कारणों से संघर्ष एक अलग विषय वस्तु है लेकिन जातियता के आधर पर संघर्ष नहीं हुआ है बनिया समाज का सर्वाध्कि महत्वपूर्ण कड़ी है यह उत्पादक और उपभोक्ता के बीच की कड़ी है इसमें लचीला और कठोरता का मिश्रित गुण होता है यह जितना ज्यादा लचीला होता है तुरंत उतना कठोर हो जाता है लेकिन इस कठोरता में किसी की हानि नहीं होती है अपने व्यवहार में तुरंत लचीला और कठोरता का गुण इसे स्थाई बनाता है इसमें विरोधभास गुण भी पाया जाता है, किसी के लिए अत्यंत संवेदनशील तो किसी के लिए अत्यंत संवेदनहीन हो जाता है संवेदनहीनता उसकी विवशता के कारण होती है संवेदनहीनता इसका स्वभाव नहीं होता। 

बनिया दूसरों की सुविध के लिए अपना संग्रहित ध्न खर्च करने में पीछे नहीं हटता है यह ध्र्मशाला, स्कूल और मंदिर का निर्माण कराता है, ध्र्मशाला और मंदिर के पास छोटी-छोटी व्यवसायी थोड़ी-सी पूंजी में परिश्रम करके लोगों को सामान्य दैनिक सुविधओं की पूर्ति कर अपना आजीविका चला लेता है। इस कार्य करने वाले बनिया में दूरदर्शिता और भविष्य दृष्टा का गुण होता है। इन्हीं गुना के कारण आज की तारीख में ध्र्मशाला विवाह भवन बन गया है और आमदनी का एक अच्छा स्रोत है। ध्र्मशाला ट्रस्टी यदि दूरदर्शी है तो इस ध्न का उपयोग समाज की व्यापक हित में करता है, आपदा के समय समाज को तत्कालीन सहायता पहुंचाता है।

भारत के गृह मंत्राी अमित शाह कलेजा ठोक कर सार्वजनिक सभा में कहते हैं, ‘मैं बनिया हूं बनिया का बेटा हूं’ अर्थात् जुबान का पाबंद हूं। बनिया गिरी को सर्वाध्कि बदनाम किया है तो वह है अमेरिका का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। जिसकी भाषा पल में माशा और पल तौला हो जाती है। दुनिया में अपनी मर्जी थोपन के लिए मनमाना ट्रैरिपफ लगा दी। दूसरे देशों के अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट पहुंचाकर अपना लाभ अर्जित करना चाहा। आज सभी देश का संबंध् विशु( बनियागिरी पर आधरित है जिस देश की सरकार बनियागिरी में निपुण है वह सपफलता दर सपफलता पाकर शिखर तक पहुंचा है।
पफल, पफूल, सब्जी चिनिया-बादाम बेचने वाला व्यवसायी, उद्योगपति ही केवल बनिया नहीं है बल्कि यहां सरकार भी बनिया है जिसमें सच्चे बनिया का गुण है वह निरंतर आगे बढ़ता जाता है इसका उदाहरण भारत का प्रधनमंत्राी नरेंद्र मोदी है। 27 जून को तीन दिवसीय राजकीय दौरे पर नरेंद्र मोदी सेशेल्स पहुंचे।  सेशेल्स की आबादी 1 लाख 20 हजार से 30000 के बीच है और क्षेत्रापफल 455 से 459 वर्ग किलोमीटर। आबादी में यह बिहार के मुजफ्रपफरपुर जिला के मुरौल खगडि़या जिला के मानसी और पटना जिला के मनेर प्रखंड के समतुल्य है जमुई का चकाई प्रखंड का क्षेत्रापफल सेशेल्स देश के लगभग बराबर है। नरेंद्र मोदी अमेरिका में तीन-चार दिन रुके हैं तो सेशेल्स में भी 3 दिन की यात्रा की है। 

बनियागिरी के मन को समझना सहज नहीं है बनियागिरी बोली या वचन की शक्ति, विश्वास और भरोसा, समय की पहचान की क्षमता, इंतजार करने का ध्ैर्य, परहित में स्वहित की पहचान यह गुण जिनके पास है वही पक्का बनिया है, उसे ही बनियागिरी का मास्टर कह सकते हैं और ये हैं नरेंद्र मोदी।

- दीपक कुमार पोद्दार ( मुंगेर 8809806760 )

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