सम्पादक जी महाराज,
जय हो!
काॅमर्स का एक छात्रा होता है तो विज्ञान का 10 छात्रा और कला का 100 छात्रा होता है। काॅमर्स और विज्ञान का छात्रा कोचिंग करता है, ट्यूशन पढ़ता है, काॅलेज रेगुलर करता हैऋ लेकिन कला के छात्रा को गेस पेपर पर ही भरोसा रहता है। परीक्षा के 3 महीने पहले गेस पेपर उपलब्ध् भी नहीं होता है, अध्कि-से-अध्कि दो माह पहले बाजार में आता है। कला के अध्किांश छात्रा इन्हीं गेस पेपर की बदौलत परीक्षा पास कर जाते हैं।
राजनीति के क्षेत्रा में आपको अध्किांश कला के क्षेत्रा से जुड़े नेता मिलेंगे। ऐसे भी नेतागिरी में सरस्वती का महत्व तो नाम मात्रा का है, जो कुछ खेला होता है, लक्ष्मी का होता है और लक्ष्मी का वाहन उल्लू है, इसलिए बड़े-बड़े राजनीतिक खेल रात में ही होते हैं, खाने-पीने की व्यवस्था के साथ होता है। अंध्ेरों में उपहारों का अदान-प्रदान भी होता है। हमारे विधयकगण चुनाव के तीन महीना पूर्व गेस पेपर की तरह जन सम्पर्क के मैदान में कूदते हैं इनकी सक्रियता से लोगों को पता चल जाता है कि आगामी दो-चार माह में चुनाव है। पिफर इनका गणेश परिक्रमा चालू होता है। जिसके भाग्य से लाॅटरी निकल जाए और 15 दिनों में इनके मेहनत का पफलापफल सामने आता है। जो जीता विधनसभा पहंुचा, जो हारा घर में सोया। चुनाव में जो निकटतम प्रतिदन्दी होते हैं जिनका दावा रहता है कि मेरी सपफलता सुनिश्चित है, उनके यहां उल्लुओं की संख्या अध्कि होती है। उल्लू अपने स्वामी के आदेश के बिना विचरण नहीं करता है। जो जीतता है, उल्लू उसके अपने बन जाते हैं, जो हारता है उल्लू भी साथ छोड़ देते हैं। बिना उल्लू के काम ही नहीं होता। साथ में घुमाने के लिए तो भी उल्लू चाहिए। उल्लू का भी भोजन-पानी होता है। हारने वाला पिफर पांच साल के लिए चादर तान कर सोता है। जनता को जीताने और हराने मात्रा से मतलब है। जीताने के बाद काम कराने की पुफर्सत नहीं है। सारी जवाबदेही विधयक की, हारने वालों से कैसा उम्मीद?
दुनिया का यही दस्तुर है, इसी मंे दुनिया आगे बढ़ रही है। राजनीति में गेस पेपर वाले आबाद होते हैं। अपवाद में टेक्स बुक पढ़ने वाले होते हैं, ऐसे लोग आगे बढ़ते हैं, तो मुड़कर नहीं देखते हैंऋ रिकार्ड बन जाता है। विधयक को मुफ्रत का सलाह है, भले ही गेस पेपर के बदौलत पास कर गये हों लेकिन टेस्ट बुक पढ़ना शुरू कर दें, बनाए यही रखेगा और उत्रोतर आगे बढ़ाएगा।
- गरीब दास टहलन
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