एनडीए से प्रायः विजेता विधयक, प्रधनमंत्राी नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्राी नीतीश कुमार के नाम पर यह सम्मान पाया है। जिसके नाम पर आपने ये सम्मान पाया है, उसके व्यक्तित्व और कृतित्व का शतांश भी आत्मसात करना चाहिए। आपको पुनः विजेता बनने के लिए आत्म निर्भर बनना चाहिए। पार्टी अगली बार उम्मीदवार बनाए तो आप अपनी गारंटी पर जीतने का दम भर सके। नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार से कह सके, श्रीमान आप मेरे क्षेत्रा में चुनावी दौरा नहीं करे, मैं चुनाव जीतने की गारंटी देता हूँऋ यह सीट पार्टी की झोली में डालूंगा।
प्रधनमंत्राी नरेन्द्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्रा वाराणसी के लिए क्या-क्या किया है? उसे देखें, समझें। मुख्यमंत्राी ने अपने गृह जिला नालन्दा को क्या-क्या सौगात दिया है? उसे देखें और समझने में थोड़ा समय दे। मोदी जी और नीतीश कुमार देश को स्वावलंबी बनाने के लिए 24 घंटा का पफर्क मिटा दिया है। मोदी जी, नींद भी यात्रा में लेते हैं।
मोदी जी के लिए हजारों विधनसभा हैं, नीतीश कुमार के लिए 243 विधनसभा है और आपके लिए एक मात्रा विधनसभा। केन्द्र और राज्य सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं को अपने विधनसभा में शत-प्रतिशत कार्यान्वित करने में आपको अपनी सारी शक्ति झोंक देनी चाहिए। रात-दिन एक कर देना चाहिए। अपने क्षेत्रा में ऐसी व्यवस्था करना चाहिए, कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित ना हो। गरीब परिवार की अवस्था सुधरने में सरकार की कौन-सी योजना काम आएगी, उस योजना से उसे लाभान्वित कराकरऋ उनके जीवन स्तर सुधरने में अपने दायित्व का निर्वहन करना चाहिए। इस प्रकार के कामों से आपको मानसिक और आत्मिक संतुष्टि मिलेगी और ईश्वर की वास्तविक पूजा होगी। मोदी जी और नीतीश कुमार का सपना साकार होगा। सरकार को लक्ष्य की प्राप्ति होगी। देश समृ( होगा।
ईश्वर ने आपको सेवा करने का अवसर और सौभाग्य दिया है। आपको अपने विधनसभा में क्यों चुना? उस पर विचार करें। ईश्वर के संकेत को समझना चाहिए। आप अपनी क्षमता भली-भांति जानते हैं। जीवन में आये ऐसे सुनहरे अवसरों को, यूँ ही जाने नहीं देना चाहिए। आप नजर उठाकर अपने पूर्व विधयक के शारीरिक, पारिवारिक, सामाजिक जीवन को पढ़ने का प्रयास करें। दर्पण की तरह सब कुछ सामने होगा। उन्होंने अवसर और सौभाग्य का कैसे उपयोग किया? वह भी आपके सामने हैं और उनका वर्तमान भी आपके समक्ष है। आप क्या पसंद करते हैं? आपकी मर्जी पर है।
आपको नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार के अतीत के पन्ने उलटने चाहिए। वे सामान्य परिवार से आये हैं, कोई राजनीतिक विरासत नहीं है। सोशल मीडिया के कारण इन दोनों महानुभावों को हर पल जनता के निगाहों में है। इसलिए सीखने और समझने का पर्याप्त अवसर है। भाषण में मोदी जी अतीत से भविष्य का विश्लेषण कर देते हैं तो नीतीश कुमार संकेत में और संक्षेप में वस्तुस्थिति अवगत करा देते हैं। विरोधभास शैली है पिफर भी दोनों सपफल हैं। किस शैली को कब और कहां अपनाना चाहिए। यह आपके स्वविवेक पर निर्भर करता है। ईमानदारी से काम करेंगे तो जनता की निगाह में निगाह डालकर बात करेंगे। केवल अपने हित के लिए
विधयकी करेंगें तो आत्मा साथ नहीं देगी। आत्मबल से हीन हो जाएंगे। गलथेथरी कर तत्काल आप अपनी पीट थपथपा लेंगे लेकिन रात में चैन की नींद नहीं सो पाएंगे। नींद ;सोनाद्ध खो देंगे, डायबिटीज और रक्तचाप सजा होगी। अवसर को सौभाग्य में बदलें और जनता के दिल में बसे।
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