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बिहार विधनसभा चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी 101 सीट पर चुनाव लड़ी। उसने आबदी के समानुपात के आधर पर वैश्य को उचित सीट दिया। जिसकी जितनी हिस्सेदारी उसकी उतनी भागीदारी का वचन वैश्य के साथ निभायी। किसी अन्यान्य राजनीतिक दल ने आबादी के समानुपात में वैश्य प्रत्याशी नहीं बनाया।

2020 ई. के चुनाव से तुलना करने पर वैश्य राजनीति भावना में कमी देखी गयी। पिछले बार 132 विधनसभा में वैश्य प्रत्याशी थे, जबकि 2025 ई. के चुनाव में इसकी संख्या घटकर 121 हो गयी है। पिछले बार कुल 189 प्रत्याशी चुनाव लड़ा तो इस बार इसकी संख्या 5 कम गयी।

वैश्य में राजनीतिक चेतना और सजगता बढ़ाने की आवश्यकता है। यह सारी आशाएं वैश्य विधयक पर टिकी है। बिहार में वैश्यों की कुल आबादी 2 करोड़ 32 लाख 96 हजार है, जो बिहार की आबादी का 17.82» है। इस आबादी में निरक्षरों की औसत संख्या 72 लाख 87 हजार 214 ;31.28»द्ध और पांचवी तक पढ़ने वालों की संख्या 52 लाख 81 हजार 366 ;22.67»द्ध है। कुल संख्या 1 करोड़ 25 लाख 68 हजार 580 है, जो 53.95» होता है। अर्थात् शिक्षा में    आध्ी से अध्कि आबादी निरक्षरों और 5वीं तक पढ़ने वालों की है। वैश्य परिवार की कुल संख्या 49 लाख 30 हजार 864 है।
अब आर्थिक हाल भी जान लें- 6000 रूपये तक मासिक कमाने वाले परिवार की औसत संख्या 16 लाख 82 हजार 761 है अर्थात् ;33.11»द्ध परिवार और 6000 रूपये से 10,000 रूपये कमाने वालों परिवार की संख्या 14 लाख 59 हजार 851 है अर्थात् ;29.6»द्ध। अर्थात् 10 हजार तक कमाने वालों की कुल संख्या 31 लाख 42 हजार 612 परिवार है, कुल 62.61» परिवार। कुल आबादी 1 करोड़ 48 लाख 33 हजार 108 है।

वैश्य विधयक उक्त तथ्य को कितनी गंभीरता से लेते हैं, यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा। यदि वैश्य  विधयक सम्मिलित रूप से इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हैं तो 2030 चुनाव में वैश्य मुख्यमंत्राी का सपना देखा जा सकता है। 


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